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शिव का प्रत्येक स्वरूप कल्याणकारी: दीप्तिबाई
मानव धर्म मंदिर पर चल रही शिवपुराण कथा का समापन
इंदौर. भारतभूमि अवतारों और देवों की ही भूमि है, उनमें भी देवों में देव केवल महादेव हैं. श्री हरि के 24 अवतार भगवान शिव के वरदान से ही हुए हैं। शिवलिंग उनका निराकार और नीलकंठ उनका साकार रूप है. शिव ज्ञान और वैराग्य के स्वरूप हैं. सर्वव्यापी परमात्मा का वंदन मन से और साकार का वंदन प्रत्यक्ष में किया जाना चाहिए. शिव का प्रत्येक स्वरूप कल्याणकारी ही होता है. शिव श्रद्धा हैं और पार्वती विश्वास. श्रद्धा और विश्वास के समन्वय से ही जीवन सार्थक होता है.
ये विचार हैं साध्वी दीप्तिबाईजी के, जो उन्होंने आज मानव उत्थान सेवा समिति इंदौर शाखा के तत्वावधान में एयरपोर्ट स्थित पटेल नगर के मानव धर्म मंदिर पर चल रहे तीन दिवसीय शिव पुराण कथा महोत्सव में व्यक्त किए. भोपाल से आई साध्वी मैत्रीबाई एवं साध्वी महाश्वेताबाई ने दीप प्रज्जवलन कर इस ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ किया. कथा प्रसंग के अनुसार शिव-पार्वती विवाह का उत्सव भी धूमधाम से मनाया गया. प्रारंभ में समिति के मुरलीभाई खन्ना ने सभी अतिथि साध्वियों का स्वागत किया. समापन अवसर पर सैकड़ों भक्तों ने कतारबद्ध होकर शिवपुराण ग्रंथ का पूजन किया.
सृष्टि में कोई कर्म बिना कारण नहीं
साध्वी दीप्तिबाई ने कहा कि भगवान शंकर के यहां कोई विषमता नहीं होती. वे संसार के सभी स्वरूपों को अपने जैसा ही प्रकट करते हैं इसलिए स्वयं के साथ पक्षपात का प्रश्र नहीं होता. जब तक हम अग्रि रूपी जिज्ञासा में स्वयं को नहीं तपाएंगे, ब्रम्ह के बारे में ज्ञान नहीं मिल पाएगा. ज्ञान पात्र लोगों से ही लिया जाना चाहिए. संसार के सभी विवाद अहम और प्रतिष्ठा के कारण होते हैं. सृष्टि में कोई भी कर्म बिना कारण के नहीं होता. मनुष्य पापकर्म दो कारणों से करता है- लोभ और भय. शिवपुराण इन्हीं अवगुणों के उन्मोचन की कथा है.


